Wednesday, 28 September 2016

तू दे दे मेरा साथ ...

बाहर से खुश हूँ मैं,
अंदर से गमगीन,

बाहर से मजबूत हूँ,
अंदर से कमजोर

अकेला पाती हूँ खुद को,
हर कोई पराया है यहाँ

जिंदगी नीरस सी हो गयी है,
जीने की वजह नहीं,
थक गयी हूँ अकेले चलते चलते

अगर जीना इतना ही जरूरी है,
तो खुश होने की एक वजह तो दे

घुटती हूँ अंदर से अकेले ही,
बिना खुशी के कब तक काटू जीवन

क्या खता हुयी है मुझसे,
कि इतना खफा है तू

तुझ पर जितना विश्वास है,
उतना और किसी पर भी नहीं

साथ दो मेरा भगवान,
और अकेले चल सकती नहीं

एक कदम भी मुश्किल है,

अब तेरे बिना।