Sunday, 24 May 2020

आरक्षण

हाँ मैं खुश हूँ आरक्षण से,

बालपन से सहा है ऊँचे लोगो का टॉर्चर,

तब तो माँ ने समझा दिया,

गाँव में ऐसा ही होता हैं बेटा,

पर आज भी छुआछूत चारो तरफ हैं,

गाँव ही नहीं शहरो में भी फैला हैं।


आरक्षण के खिलाफ बोलने वालों से पूछो,

क्या कभी निचले लोगो को सम्मान दिया हैं,

वैसे तो उन्हें एससी / एसटी के जितना आरक्षण चाहिए,

एक बार उनकी जिंदगी जी कर भी देखो।


इन लोगों को,

किसने हक़ दिया हैं हमें नीचा दिखाने का,

हमारे हाथ लगा पानी पी नहीं सकते,

और बात करते हैं हमारा हक़ छिनने का।


अगर आरक्षण के इतना ही खिलाफ हो,

तो एक बार जातिवाद, छुआछूत हटाने की भी सोचो,

खाने, पीने, रहने, पैसे में बराबरी चाहिए इन्हें,

अपने व्यवहार में तो बराबरी लाओ,

देखो अपने अंदर कितना जहर भरा हैं।


बड़ड़पन जाति से नहीं, खून से नहीं,

व्यवहार से आता हैं,

लाओ अपनी वाणी में मधुरता,

न जाने कब, कौनसे मोड़ पर,

तुम्हें उसी इंसान की जरूरत पड़ जाये,

जिसकी तुमने कभी बेइज्जती की थी।

 

Wednesday, 28 September 2016

तू दे दे मेरा साथ ...

बाहर से खुश हूँ मैं,
अंदर से गमगीन,

बाहर से मजबूत हूँ,
अंदर से कमजोर

अकेला पाती हूँ खुद को,
हर कोई पराया है यहाँ

जिंदगी नीरस सी हो गयी है,
जीने की वजह नहीं,
थक गयी हूँ अकेले चलते चलते

अगर जीना इतना ही जरूरी है,
तो खुश होने की एक वजह तो दे

घुटती हूँ अंदर से अकेले ही,
बिना खुशी के कब तक काटू जीवन

क्या खता हुयी है मुझसे,
कि इतना खफा है तू

तुझ पर जितना विश्वास है,
उतना और किसी पर भी नहीं

साथ दो मेरा भगवान,
और अकेले चल सकती नहीं

एक कदम भी मुश्किल है,

अब तेरे बिना।

Friday, 29 April 2016

"प्यार"

प्यार एक पूजा है
प्यार है इबादत
प्यार एक शायरी है
प्यार है मोहब्बत

इमोश्न्स को कहते है प्यार
फीलिंग्स से जगता है प्यार
प्यार बिना दुनिया नहीं
बिना इसके चैन नहीं

जागने में प्यार है
सोने में है प्यार
संसार के हर शब्द में प्यार है
जीवन के पल पल में है प्यार

कृष्णा में प्यार है
गणेशा में है प्यार
प्यार से ही दुनिया चलती है
इसके बिना तो हर कदम बेकार है

प्यार एक आकर्षण है
प्यार है एक एहसास
आज में प्यार है
कल में है प्यार

सुबह में प्यार है
शाम में है प्यार
तुमसे प्यार है 
तुम ही में है प्यार

तुम्हारी हर सांस में प्यार है
बिना तुम्हारे मैं कुछ भी नहीं
तुम ही से ये जीवन है
चलना है हर कदम साथ

बिन तुम्हारे कल्पना भी नहीं
जीना है साथ 
मरना भी साथ है
कसम मुझे तुम्हारी

कभी ना छोडूंगी साथ
ना जाने दूँगी अपने से दूर
प्यार है तुमसे
बस तुम ही से प्यार है

Thursday, 4 February 2016

"सिर्फ वो"

माँ ने था पाला, बड़ा किया
गलियों में थी घूमी वो, आँगन में खेली
अम्मा की लाड़ली वो, बाबा की थी दुलारी
पल पल याद आती वो मीठी गिरि

चली थी स्कूल वो उठाये थैला
गुरु का गुरूर वो, बच्चो की थी प्रेरणा
बहनों का थी सहारा वो, भाई का घमंड
पलकें भिगोयें ये शाम की गपशप

माँ की थी जान वो, पापा की शान
आज बनी थी, बेटी से बहू वो
कितने रिश्ते थे मिले उसे
भाभी - ननद से चमका था घर

रिश्तो की लड़ी में जुड़ा नाम और
जब हुआ था सम्पन्न जीवन उसका
एक नन्ही जान ने बदला जीवन
मिला सौभाग्य माँ वो कहलायी

धीरे से ये उम्र ढली थी
माँ – पापा को भूल चली थी
पराए घर को अपनाया उसने
क्या खूब भाग्य था पाया उसने

लिया था जन्म कहीं और
अंतिम सांस कहीं और ही पायी
नमन है उस माँ, बहन, बेटी को
जिसने ये जीवन है सवांरा।

Tuesday, 13 January 2015

शिकायत है मेरी रब से......

इतनी सिद्धत से पूजा था तुम्हे।
इतना विश्वास हमारे बीच था।
फिर ये तूने क्या कर दिया।
सोचा नहीं एक बार मेरे बारे में।

कहते हैं कि तू हैं कहीं तो।
किसी पत्थर में, किसी मूरत में बसा हैं।
पर मैंने तो तुझे अपने मन में बसाया था।
जितना विश्वास अपने पर था।
उतना तुझ पर दिखाया था।

फिर क्या खता हुई मुझसे।
जो तूने ऐसा किया मेरे साथ।
मेरे सारे सपने तो पहले ही टूट चुके थे।
अब क्यूँ ये खुशी भी छीन ली।

केसे रहूँगी मैं तेरे इस संसार में।
जब सब तेरे हिसाब से होना था।
तो क्यूँ मुझे इतने सपने दिखाये।
क्यूँ मेरा मज़ाक बनाया।

अब तो ख़्वाहिश ही मर गयी हैं।
तेरे बनाये पथ पर चलने की।
ना रह गयी कोई इच्छा, अपने जीवन की।
तू चला, मैं चलूँगी।
आखिर डोर जो तेरे हाथ में है।

पर याद रखना हमेशा।
सच के पथ पर चलने वाले का।
तूने इस तरह मजाक बनाया है।
अब कोई नहीं चलेगा तेरी राह पर।

रहा मेरा सवाल।
तो चलूँगी तेरी कदमो की छाप पर।
चल, ले चल मुझे।
जहाँ तक है ले जाना।

बिना किसी मन के।
बिना किसी खुशी के।
सिर्फ शरीर चलेगा मेरा।
तेरे दिखाये पथ पर।

धन्यवाद, जो मुझे ये दुनिया दिखायी।
ध्न्यवाद, जो ये संसार दिखाया।

Monday, 8 December 2014

ओ.....कान्हा .......

ये दुनिया कहीं खो सी गयी है।
लोग एक दूसरे से उखड़ से गए है।

क्या...कुछ हो सकता हे कृष्ण ?
कभी धर्मयुद्ध करवाया था आपने

इस संसार मे धर्म और न्याय के लिए
पर क्या लाभ हुआ उस 'महाभारत' का

आज हमारे देश मे अधर्म और बढ़ गया है
चारो तरफ सिर्फ अन्याय ही दिखता है

द्रौपदी को तो न्याय दिला दिया आपने
हम लोगो के न्याय का क्या ?

यहाँ कोई भीम नही जो हमारे लिए लड़े
कोई इंसान नही जो हमारी रक्षा करें

बनना होगा हमे दुर्गा...
क्योंकि ये दुष्ट इसी लायक है

यहाँ द्रौपदी की लाज बचाने कृष्ण नही आएंगे
खुद उसे ही दुर्गा बनना होगा

हे गोविंद... क्या फिर से महाभारत होगी
क्या फिर विध्वंस होगा इस संसार के भले के लिए

गोविंद.... बचा लो इस जहां को
कहीं अधर्म की आग मे ज्वालामुखी न फूट पड़े

बचा लो......कान्हा 

Friday, 30 May 2014

ना जाने ये क्‍या हैं,




ना जाने ये क्‍या हैं,
कौन सही है कौन गलत हैं,

क्‍या पता मैं कितनी सही हूं,
ये दुनिया कितनी भ्रष्‍ट है,

सबको मालूम है कि वो खुद भी गलत है,
फिर भी एक दूजे पर लगाते आरोप हैं,

कोई बदलना चाहता ही नहीं,
बस चाहते हैं तो सबको बदलना,

जब तक हम खुद नहीं बदलेंगें,
तब तक दुसरे से कैसे उम्‍मीद कर सकते हैं,

एक- दुजे से ही तो ये संसार बना हैं,
रोज सुनने में आता है,
कल यहां कुछ गलत हुआ था, आज वहां,

गलत काम करने वाला बाहर से तो आता नहीं है,
आखिर है तो इसी दुनिया का, 

हमारे ही बीच जन्‍म लेता है, बडा होता है,
उसकी भी मां बहनें हैं,

फिर वो क्‍यों नहीं हर लडकी को सम्‍मान देता,
क्‍यों नहीं किसी की मां, बहन को सम्‍मान देता,

अगर हर आदमी ऐसा सोचता,
तो फिर किसी पिता, पति, भाई को,
चिंता करने की जरूरत ही नहीं पडती।