Wednesday, 28 September 2016

तू दे दे मेरा साथ ...

बाहर से खुश हूँ मैं,
अंदर से गमगीन,

बाहर से मजबूत हूँ,
अंदर से कमजोर

अकेला पाती हूँ खुद को,
हर कोई पराया है यहाँ

जिंदगी नीरस सी हो गयी है,
जीने की वजह नहीं,
थक गयी हूँ अकेले चलते चलते

अगर जीना इतना ही जरूरी है,
तो खुश होने की एक वजह तो दे

घुटती हूँ अंदर से अकेले ही,
बिना खुशी के कब तक काटू जीवन

क्या खता हुयी है मुझसे,
कि इतना खफा है तू

तुझ पर जितना विश्वास है,
उतना और किसी पर भी नहीं

साथ दो मेरा भगवान,
और अकेले चल सकती नहीं

एक कदम भी मुश्किल है,

अब तेरे बिना।

Friday, 29 April 2016

"प्यार"

प्यार एक पूजा है
प्यार है इबादत
प्यार एक शायरी है
प्यार है मोहब्बत

इमोश्न्स को कहते है प्यार
फीलिंग्स से जगता है प्यार
प्यार बिना दुनिया नहीं
बिना इसके चैन नहीं

जागने में प्यार है
सोने में है प्यार
संसार के हर शब्द में प्यार है
जीवन के पल पल में है प्यार

कृष्णा में प्यार है
गणेशा में है प्यार
प्यार से ही दुनिया चलती है
इसके बिना तो हर कदम बेकार है

प्यार एक आकर्षण है
प्यार है एक एहसास
आज में प्यार है
कल में है प्यार

सुबह में प्यार है
शाम में है प्यार
तुमसे प्यार है 
तुम ही में है प्यार

तुम्हारी हर सांस में प्यार है
बिना तुम्हारे मैं कुछ भी नहीं
तुम ही से ये जीवन है
चलना है हर कदम साथ

बिन तुम्हारे कल्पना भी नहीं
जीना है साथ 
मरना भी साथ है
कसम मुझे तुम्हारी

कभी ना छोडूंगी साथ
ना जाने दूँगी अपने से दूर
प्यार है तुमसे
बस तुम ही से प्यार है

Thursday, 4 February 2016

"सिर्फ वो"

माँ ने था पाला, बड़ा किया
गलियों में थी घूमी वो, आँगन में खेली
अम्मा की लाड़ली वो, बाबा की थी दुलारी
पल पल याद आती वो मीठी गिरि

चली थी स्कूल वो उठाये थैला
गुरु का गुरूर वो, बच्चो की थी प्रेरणा
बहनों का थी सहारा वो, भाई का घमंड
पलकें भिगोयें ये शाम की गपशप

माँ की थी जान वो, पापा की शान
आज बनी थी, बेटी से बहू वो
कितने रिश्ते थे मिले उसे
भाभी - ननद से चमका था घर

रिश्तो की लड़ी में जुड़ा नाम और
जब हुआ था सम्पन्न जीवन उसका
एक नन्ही जान ने बदला जीवन
मिला सौभाग्य माँ वो कहलायी

धीरे से ये उम्र ढली थी
माँ – पापा को भूल चली थी
पराए घर को अपनाया उसने
क्या खूब भाग्य था पाया उसने

लिया था जन्म कहीं और
अंतिम सांस कहीं और ही पायी
नमन है उस माँ, बहन, बेटी को
जिसने ये जीवन है सवांरा।