Sunday, 24 May 2020

आरक्षण

हाँ मैं खुश हूँ आरक्षण से,

बालपन से सहा है ऊँचे लोगो का टॉर्चर,

तब तो माँ ने समझा दिया,

गाँव में ऐसा ही होता हैं बेटा,

पर आज भी छुआछूत चारो तरफ हैं,

गाँव ही नहीं शहरो में भी फैला हैं।


आरक्षण के खिलाफ बोलने वालों से पूछो,

क्या कभी निचले लोगो को सम्मान दिया हैं,

वैसे तो उन्हें एससी / एसटी के जितना आरक्षण चाहिए,

एक बार उनकी जिंदगी जी कर भी देखो।


इन लोगों को,

किसने हक़ दिया हैं हमें नीचा दिखाने का,

हमारे हाथ लगा पानी पी नहीं सकते,

और बात करते हैं हमारा हक़ छिनने का।


अगर आरक्षण के इतना ही खिलाफ हो,

तो एक बार जातिवाद, छुआछूत हटाने की भी सोचो,

खाने, पीने, रहने, पैसे में बराबरी चाहिए इन्हें,

अपने व्यवहार में तो बराबरी लाओ,

देखो अपने अंदर कितना जहर भरा हैं।


बड़ड़पन जाति से नहीं, खून से नहीं,

व्यवहार से आता हैं,

लाओ अपनी वाणी में मधुरता,

न जाने कब, कौनसे मोड़ पर,

तुम्हें उसी इंसान की जरूरत पड़ जाये,

जिसकी तुमने कभी बेइज्जती की थी।