ये दुनिया कहीं खो सी गयी है।
लोग एक दूसरे से उखड़ से गए है।
क्या...कुछ हो सकता हे कृष्ण ?
कभी धर्मयुद्ध करवाया था आपने
इस संसार मे धर्म और न्याय के लिए
पर क्या लाभ हुआ उस 'महाभारत' का
आज हमारे देश मे अधर्म और बढ़ गया है
चारो तरफ सिर्फ अन्याय ही दिखता है
द्रौपदी को तो न्याय दिला दिया आपने
हम लोगो के न्याय का क्या ?
यहाँ कोई भीम नही जो हमारे लिए लड़े
कोई इंसान नही जो हमारी रक्षा करें
बनना होगा हमे दुर्गा...
क्योंकि ये दुष्ट इसी लायक है
यहाँ द्रौपदी की लाज बचाने कृष्ण नही आएंगे
खुद उसे ही दुर्गा बनना होगा
हे गोविंद... क्या फिर से महाभारत होगी
क्या फिर विध्वंस होगा इस संसार के भले के लिए
गोविंद.... बचा लो इस जहां को
कहीं अधर्म की आग मे ज्वालामुखी न फूट पड़े
बचा लो......कान्हा