Monday, 8 December 2014

ओ.....कान्हा .......

ये दुनिया कहीं खो सी गयी है।
लोग एक दूसरे से उखड़ से गए है।

क्या...कुछ हो सकता हे कृष्ण ?
कभी धर्मयुद्ध करवाया था आपने

इस संसार मे धर्म और न्याय के लिए
पर क्या लाभ हुआ उस 'महाभारत' का

आज हमारे देश मे अधर्म और बढ़ गया है
चारो तरफ सिर्फ अन्याय ही दिखता है

द्रौपदी को तो न्याय दिला दिया आपने
हम लोगो के न्याय का क्या ?

यहाँ कोई भीम नही जो हमारे लिए लड़े
कोई इंसान नही जो हमारी रक्षा करें

बनना होगा हमे दुर्गा...
क्योंकि ये दुष्ट इसी लायक है

यहाँ द्रौपदी की लाज बचाने कृष्ण नही आएंगे
खुद उसे ही दुर्गा बनना होगा

हे गोविंद... क्या फिर से महाभारत होगी
क्या फिर विध्वंस होगा इस संसार के भले के लिए

गोविंद.... बचा लो इस जहां को
कहीं अधर्म की आग मे ज्वालामुखी न फूट पड़े

बचा लो......कान्हा 

Friday, 30 May 2014

ना जाने ये क्‍या हैं,




ना जाने ये क्‍या हैं,
कौन सही है कौन गलत हैं,

क्‍या पता मैं कितनी सही हूं,
ये दुनिया कितनी भ्रष्‍ट है,

सबको मालूम है कि वो खुद भी गलत है,
फिर भी एक दूजे पर लगाते आरोप हैं,

कोई बदलना चाहता ही नहीं,
बस चाहते हैं तो सबको बदलना,

जब तक हम खुद नहीं बदलेंगें,
तब तक दुसरे से कैसे उम्‍मीद कर सकते हैं,

एक- दुजे से ही तो ये संसार बना हैं,
रोज सुनने में आता है,
कल यहां कुछ गलत हुआ था, आज वहां,

गलत काम करने वाला बाहर से तो आता नहीं है,
आखिर है तो इसी दुनिया का, 

हमारे ही बीच जन्‍म लेता है, बडा होता है,
उसकी भी मां बहनें हैं,

फिर वो क्‍यों नहीं हर लडकी को सम्‍मान देता,
क्‍यों नहीं किसी की मां, बहन को सम्‍मान देता,

अगर हर आदमी ऐसा सोचता,
तो फिर किसी पिता, पति, भाई को,
चिंता करने की जरूरत ही नहीं पडती।

Maa - Paa




कहते है इस मतलबी दुनिया में हमारी जगह नहीं।
पर मैंने महसूस किया हर जगह ऐसा है नहीं।।

मैंने पाया स्‍वर्ग, मेरे मां के चरणों में।
पापा की आंखों में देखा ढेर सारा प्‍यार।।

जिस दुनिया में लडकियों को जीने का हक नहीं दिया जाता।
उसी दुनिया में मम्‍मी-डैडी ने लुटिया ढेरों प्‍यार हम पर।।

बेटा-बेटी में कभी ना फर्क करने वाले।
मेरे ‘’माता पिता’’ ने हमें जन्‍नत दिखाई।।

रहना चाहूंगी हमेशा उनके दिल में।
क्‍योंकि ये सही है ‘’मातापिता’’ के चरणों में स्‍वर्ग है।।

सफल हुआ जीवन मेरा, आपकी कोख से जन्‍म लेकर
रहेगा हमेशा आभार आपका, ये जीवन पाकर।।