इतनी सिद्धत से पूजा था तुम्हे।
इतना विश्वास हमारे बीच था।
फिर ये तूने क्या कर दिया।
सोचा नहीं एक बार मेरे बारे में।
कहते हैं कि तू हैं कहीं तो।
किसी पत्थर में, किसी मूरत में बसा हैं।
पर मैंने तो तुझे अपने मन में बसाया था।
जितना विश्वास अपने पर था।
उतना तुझ पर दिखाया था।
फिर क्या खता हुई मुझसे।
जो तूने ऐसा किया मेरे साथ।
मेरे सारे सपने तो पहले ही टूट चुके थे।
अब क्यूँ ये खुशी भी छीन ली।
केसे रहूँगी मैं तेरे इस संसार में।
जब सब तेरे हिसाब से होना था।
तो क्यूँ मुझे इतने सपने दिखाये।
क्यूँ मेरा मज़ाक बनाया।
अब तो ख़्वाहिश ही मर गयी हैं।
तेरे बनाये पथ पर चलने की।
ना रह गयी कोई इच्छा, अपने जीवन की।
तू चला, मैं चलूँगी।
आखिर डोर जो तेरे हाथ में है।
पर याद रखना हमेशा।
सच के पथ पर चलने वाले का।
तूने इस तरह मजाक बनाया है।
अब कोई नहीं चलेगा तेरी राह पर।
रहा मेरा सवाल।
तो चलूँगी तेरी कदमो की छाप पर।
चल, ले चल मुझे।
जहाँ तक है ले जाना।
बिना किसी मन के।
बिना किसी खुशी के।
सिर्फ शरीर चलेगा मेरा।
तेरे दिखाये पथ पर।
धन्यवाद, जो मुझे ये दुनिया दिखायी।
ध्न्यवाद, जो ये संसार दिखाया।
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