Monday, 19 August 2013

मेरे पापा


जब छोटी थी तो लगता था, 
पापा ही है मेरी दुनिया

बड़ी हुयी तो जाना, 
मैं हूँ पापा की दुनिया

मैं हूँ पापा की गुड़िया, 
कितनी ही बड़ी क्यूँ ना हो जाऊँ
हमेशा रहूँगी उनकी लाड़ली बिटिया

बचपन में हर छोटी चीज़ के लिए 
जिदद किया करती थी

पर अब सोचती हूँ 
उनके हर कम में मदद करू, उन्हे सहारा दू

छोटी थी तो पापा की उंगली, 
थामे घूमा करती थी

अब लगता है पापा मैं आपका सहारा बनू,
अपने साथ लेकर चलु

बस आप सोचिए मैं हूँ ना आपके पास, 
आपकी मदद क लिए


आपकी हर खवाहिश पूरी करने के लिए

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